जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
पुष्पों की माला जो लाये
उसका थोड़ा मान बढ़ाते
कर-कमलों में था सही
हृदय में भी उसे सजाते ||
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
नयनों के मिलन की, मधुस्मृति
पलकों में थोड़ा और बसाते
मन-मंदिर में था प्रेम सही
अंतरमन में भी उसे जगाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
हर्षित था वो समय, मधुर
कंचन-वर्ण थोड़ा उसे पहनाते
पल-भर की वो बात अधूरी
कुछ तो मुझसे कर जाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
हाथों का वो मृदु, मिलन
हृदय भी थोड़ा करीब लाते
तन-मन की बात सही
अपनापन कुछ और जताते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
बंधन था वो अमर, अटूट
भाग्य, अनघ थोड़ा कर जाते
मन-मानस में अपनाया सही
प्राणों में भी तो बस जाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
जन्म-मृत्यु का चक्र, विहित
आकर उसे पावन कर जाते
प्रणय के पथ पर विरह सही
स्नेह-सुधा कुछ तो बरसाते |
माना जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह कर जाते ||
लेकिन कुछ कह जाते ||
पुष्पों की माला जो लाये
उसका थोड़ा मान बढ़ाते
कर-कमलों में था सही
हृदय में भी उसे सजाते ||
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
नयनों के मिलन की, मधुस्मृति
पलकों में थोड़ा और बसाते
मन-मंदिर में था प्रेम सही
अंतरमन में भी उसे जगाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
हर्षित था वो समय, मधुर
कंचन-वर्ण थोड़ा उसे पहनाते
पल-भर की वो बात अधूरी
कुछ तो मुझसे कर जाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
हाथों का वो मृदु, मिलन
हृदय भी थोड़ा करीब लाते
तन-मन की बात सही
अपनापन कुछ और जताते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
बंधन था वो अमर, अटूट
भाग्य, अनघ थोड़ा कर जाते
मन-मानस में अपनाया सही
प्राणों में भी तो बस जाते |
जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह जाते ||
जन्म-मृत्यु का चक्र, विहित
आकर उसे पावन कर जाते
प्रणय के पथ पर विरह सही
स्नेह-सुधा कुछ तो बरसाते |
माना जाना ही था जाते
लेकिन कुछ कह कर जाते ||